Monday, March 31, 2025

बच्चे के व्यक्तित्व विकास में सांस्कृतिक गतिविधियों की भूमिका

 

बच्चे के व्यक्तित्व विकास में सांस्कृतिक गतिविधियों की भूमिका

Cultural Activities role of personality development of child

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विद्यार्थियों को जितना ज्ञान किताबों से मिलता है उससे कई गुना ज्ञान वे सामाजिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शैक्षणिक व खेलकूद गतिविधियों से हासिल करते हैं। 

शिक्षा के साथ-साथ छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकासात्मक गतिविधियों का आयोजन कराया जा रहा है वह छात्र-छात्राओं के मानसिक विकास के लिए अच्छा प्रयास है। खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास होता है। विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन पूरे वर्ष भर किया जाता है| आज के इस प्रेजेंटेशन में हम जानेंगे विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियां के आयोजन प्रकार, विद्यालय में इन सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन का क्या महत्व और लाभ |

 विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन भी छात्र के     विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अकादमिक शिक्षण के साथ-साथ विद्यार्थियों को सह शैक्षिक     प्रतियोगिताओं में भी भागीदारी करना शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अंग है। इससे बालक में         सामाजिकता, नेतृत्व गुण, सामाजिक उपयोगिता, सहनशीलता की भावनाएं विकसित होती हैं और     बालक का सर्वांगीण विकास होता है।

विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने से आशय है-विद्यार्थियों को अपने समाज और देश की संस्कृति से अवगत कराना और भावी जीवन के लिए सामाजिकता की भावना भरना।

·         सांस्कृतिक गतिविधियों का तात्पर्य-- ऐसी गतिविधियाँ जो सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को मूर्त रूप देती हैं या व्यक्त करती हैं, भले ही उनका व्यावसायिक मूल्य कुछ भी हो। सांस्कृतिक गतिविधियाँ अपने आप में एक अंत हो सकती हैं या वे सांस्कृतिक वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में योगदान दे सकती हैं।

सांस्कृतिक जागरूकता और परंपरा छोटे बच्चों को पहचान की सकारात्मक भावना विकसित करने और आत्म-सम्मान बनाने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि सांस्कृतिक प्रशंसा और जागरूकता एक सकारात्मक आत्म छवि बनाने में योगदान करती है।

·         बचपन की शिक्षा में संस्कृति क्यों महत्वपूर्ण है? --- शोध से पता चलता है कि जो वयस्क बच्चों को सांस्कृतिक रूप से उत्तरदायी शैक्षिक अनुभवों में शामिल करते हैं वे निम्न में मदद करते हैं: छोटे बच्चों के आत्मविश्वास और कौशल का निर्माण करना । बच्चों की जागरूकता, प्रशंसा और विविध विश्वासों और संस्कृतियों को शामिल करना। बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धि और शैक्षिक सफलता को अधिकतम करें|

·         सांस्कृतिक गतिविधियां बनाम व्यक्तित्व विकास -- सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारी संस्कृति का आइना होते हैं। किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रतिभागिता करने से व्यक्ति का बौद्धिक विकास भी होता है।

·         सांस्कृतिक गतिविधियों के उद्देश्य -- गुणवत्ता और कलात्मक नवीनीकरण को बढ़ावा देना; एक गतिशील सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना जो संरक्षित, उपयोग और विकसित है; अंतर्राष्ट्रीय और अंतर-सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सहयोग को बढ़ावा देना

·         संस्कृति के विकास में शिक्षा की भूमिका— शिक्षा सांस्कृतिक परिवर्तनों आदि की दृष्टि से महत्ती भूमिका निभाती है। इस विवेचन से स्पष्ट है कि शिक्षा द्वारा संस्कृति को जीवित रखा जा सकता है तथा संस्कृति का विकास किया जाना संभव हो पाता है। इसका आशय है कि शिक्षा और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक है और दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करते है।

सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रकार

विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियां अनेक प्रकार से आयोजित की जा सकती हैं। सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन में उपलब्ध सह शैक्षणिक सामग्री और साधनों के आधार पर विभिन्न प्रकार की सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं।विद्यालय में कुछ महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियां इस प्रकार हैं-

  • पाठ्य सहगामी गतिविधियां 
  • राष्ट्रीय पर्व की गतिविधियां 
  •  सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम
  • कला एवं संगीत के क्षेत्र की गतिविधियां 
  • साहित्यिक गतिविधियां 
  • खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन
  • क्विज प्रतियोगिता का आयोजन
  • वार्षिक समारोह कार्यक्रम
  • स्वास्थ्य और जीवन कौशल से संबंधित

सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्व

सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्व है कि विद्यार्थियों को अच्छे समाज और देश के हित में सुनागरिक  बनाकर जीवन क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने और अच्छे समाज के निर्माण के लिए तैयार किया जा सके।

विद्यालय सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन से बालकों को अभूतपूर्व लाभ मिलता है और उन्हें मात्र सैद्धांतिक जीवन के बजाय प्रैक्टिकली जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है जिससे वे भावी जीवन के लिए आने वाले संघर्षों और कठिनाइयों से मुकाबला करने के लिए तैयार होते हैं।

सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने से विद्यार्थियों में बहुत सारे गुणों का विकास होता है। सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने का महत्व इस प्रकार हैं--

  • सामाजिकता की भावना का विकास
  • नेतृत्व क्षमता का विकास
  • शिक्षक और छात्रों में भावनात्मक लगाव
  • शिक्षक के प्रति छात्रों का व्यक्तिगत प्रेम व आदर
  • अनुशासन की भावना का विकास
  • सामंजस्य की भावना का विकास
  • परस्पर सहायता करने की प्रवृत्ति का विकास
  • आत्मविश्वास में वृद्धि विभिन्न कौशलों का विकास

·         सामाजिकता की भावना – सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने से विद्यार्थी में सामाजिकता की भावना का विकास होता है|

·         नेतृत्व की क्षमता विकास – सांस्कृतिक गतिविधियां विद्यार्थी को नेतृत्व क्षमता प्रदान करती हैं|

·         धैर्य और सहनशीलता – सांस्कृतिक गतिविधियों से बालक में धैर्य और सहनशीलता की भावना विकसित होती है|

·         शिक्षक और छात्रों में भावनात्मक लगाव – सांस्कृतिक गतिविधियों से शिक्षक और छात्रों में आपसी इसने हैं और लगाव की भावना उत्पन्न होती है जिससे शिक्षक छात्रों के रूचि और व्यवहार कौशल को समझ पाता है तथा उन्हें भविष्य में सही कैरियर चुनने में सहायता करता है।

·         शिक्षक के प्रति छात्रों का व्यक्तिगत प्रेम – छात्रों का अपने गुरु के प्रति सम्मान की भावना में वृद्धि होती है और छात्र शिक्षक के प्रति जुड़ाव महसूस करता है जिससे वह अपनी सामाजिक या व्यक्तिगत समस्याएं भी शिक्षक को बेझिझक बता सकता है।

·         अनुशासन की भावना विकसित होना – सांस्कृतिक गतिविधियों से छात्रों में अनुशासन की भावना का विकास होता है|

·         सामंजस्य की भावना -विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने के लिए छात्र एक दूसरे की जरूरतें महसूस करते हैं और उनमें सामंजस्य adjustment की भावना का तीव्र गति से विकास होता है। वे समकालीन परिस्थितियों के अनुसार और जरूरतों के अनुसार अपने आप को ढालने और सामंजस्य बैठाने की कोशिश करते हैं।

·         सहायता करना -सांस्कृतिक गतिविधियों में छात्र यह सीखते हैं कि एक दूसरे की सहायता कैसे की जाए, यह सहायता करने की भावना किसी को व्याख्या लेक्चर देने से नहीं पनपती बल्कि कार्य क्षेत्र में एक दूसरे के साथ किसी प्रोजेक्ट पर कार्य करने से अपने आप यह भावना विकसित होती हैं और छात्र ने केवल आपस में बल्कि समाज और परिवार में भी सहायता करने की भावना को सीखते हैं।

·         आत्मविश्वास उत्पन्न होना-जब विद्यार्थी मंच पर आकर प्रस्तुति देते हैं या कोई प्रोजेक्ट संबंधी कार्य करते हैं तो बालकों में आत्मविश्वास की भावना जागृत होती है, अपने आप पर कॉन्फिडेंस आता है और विपरीत परिस्थितियों में भी घबराते नहीं हैं बल्कि उन्हें यह आत्मविश्वास मजबूत और संघर्षों से सामना करने की शक्ति देता है।

·         विभिन्न कौशल का विकास-विद्यार्थियों में सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन के माध्यम से विभिन्न प्रकार के कौशल विकसित किए जा सकते हैं। यह कौशल हस्तशिल्प से लेकर कंप्यूटर या और भी कई टेक्नोलॉजी के प्रति हो सकता है। इन कौशल के माध्यम से विद्यार्थी के अंदर विभिन्न चीजों के प्रति आकर्षण बढ़ता है और वे इन्हें सहजता के साथ कर सकते हैं साथ ही भावी जीवन में इनसे कैरियर भी बना सकते हैं। वे छात्रों को नए कौशल हासिल करने में मदद करते हैं जिन्हें उनके जीवन में लागू किया जा सकता है, जैसे कि नेतृत्व, टीम वर्क, सहयोग और समस्या समाधान, जो उन्हें स्कूली जीवन के लिए तैयार करते हैं।

सांस्कृतिक गतिविधियों के लाभ

विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन करने का उद्देश्य होता है विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना। यदि आप विद्यालय में नियमित तौर पर सांस्कृतिक और सह शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन करते हैं तो विद्यार्थियों में निम्न गुण विकसित होते हैं। सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन से होने वाले लाभ।

विद्यार्थियों की राष्ट्र और समाज तथा गौरवशाली परंपरा को समझने में सहायता मिलती है

विद्यार्थी अपने गौरवशाली इतिहास और परंपराओं का सम्मान करना सीखता है

सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन से विद्यालय के विद्यार्थी अपनी पूर्व पीढ़ी के आचार विचार व्यवहार और परंपराओं से परिचित होते हैं

विद्यार्थियों को प्राचीन और आधुनिक सांस्कृतिक के बदलाव की समझ होती है और वह परंपरागत और आधुनिक संस्कृति को अच्छी तरह से समझ पाते हैं

विद्यार्थी सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से परंपरागत रूढ़ियों और अंधविश्वासों के प्रति जागरूक होते हैं

विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने से विद्यार्थियों को नैतिक शिक्षा मिलती है और उनमें नैतिक मूल्यों का विकास होता है

परंपराओं का अंधानुकरण करने के बजाए विद्यार्थी सही और गलत का वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अवलोकन करते हैं

विद्यार्थी दैनिक जीवन में प्राचीन और उपयोगी आचार विचार और सांस्कृतिक परंपराओं की समझ से रूबरू होने से अपने जीवन में ढालने का प्रयास करते हैं।

विलुप्त हो रही सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति विद्यार्थी में जिज्ञासा भावना पैदा होती है और वे उनके महत्व को स्वीकार करते हैं

भारतीय संस्कृति और ज्ञान की परख होने के बाद वे वर्तमान परिस्थितियों और सामाजिक संदर्भों में इनका मूल्यांकन करना सीखते हैं

सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्र और समाज को महत्वपूर्ण और उपयोगी संदेश दिए जा सकते हैं जो किसी भी प्रचार प्रसार से अधिक प्रभावी होता है

अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

·         विद्यार्थियों में सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रति जागरूकता -- विद्यालय सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन से बालकों को अभूतपूर्व लाभ मिलता है और उन्हें मात्र सैद्धांतिक जीवन के बजाय प्रैक्टिकली जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है जिससे वे भावी जीवन के लिए आने वाले संघर्षों और कठिनाइयों से मुकाबला करने के लिए तैयार होते हैं।

·         स्कूली शिक्षा में सांस्कृतिक शिक्षा की जरूरत -  इससे बालक में सामाजिकता, नेतृत्व गुण, सामाजिक उपयोगिता, सहनशीलता की भावनाएं विकसित होती हैं और बालक का सर्वांगीण विकास होता है। विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित करने से आशय है-विद्यार्थियों को अपने समाज और देश की संस्कृति से अवगत कराना और भावी जीवन के लिए सामाजिकता की भावना भरना।

·         बच्चों में सांस्कृतिक जागरूकता का विकास -- फिल्मों, कला, भोजन और कार्यक्रमों के माध्यम से अपने बच्चे को अंतर-सांस्कृतिक अनुभवों से परिचित कराएं । अपने बच्चे को स्वाभाविक रूप से जातीय विविधता से परिचित कराते हुए मज़े करें। अपने बच्चे को अन्य भाषाओं में आम वाक्यांशों को सिखाना उन्हें विविध संस्कृतियों को पहचानने में मदद करने का एक और तरीका है।

एक पेड़ की नियति

 

एक पेड़ की नियति

देख रहे हो न विनोद पेड़ को! फलों और फूलों से लदा इतरा रहा है, इतराए भी क्यों न! पेड़ के जीवन का सौंदर्य और उन्नति भी तो इसी में निहित है। लेकिन उससे ज्यादा उसकी शाखों पर लगे फूल और फल इतरा रहे हैं। अपने सौंदर्य और उपयोगिता के कारण उन्हें ऐसा लगता है कि पेड़ की उपादेयता हमारी वजह से है लेकिन उन्हें कौन समझाए!खैर, उधर पेड़ भी इन फूलों और फलों को देखकर फूला नहीं समा रहा। उसे लगता है कि उसका जीवन सफल और सार्थक हो गया।

लेकिन शायद पेड़ को अपनी नियति का भान नहीं था, समय के साथ फूल और फल दोनों ही उसे छोड़ चले। पेड़ निराश हुआ लेकिन हताश नहीं। उसने पुनः अपनी प्राण-वायु से स्वयं को फूलों और फलों से लकदक कर लिया लेकिन इसका हश्र भी वही हुआ, फल और फूल पुनः उसे छोड़ चले। ऐसी प्रक्रिया उसके साथ कई सालों तक चली। अंततः उसकी निराशा हताशा में बदलने लगी और वह टूटने लगा। इस टूटन की प्रक्रिया में फूलों और फलों के बाद पत्ते भी जो पेड़ों की वजह से हरे थे, उन्हें यह गुमान था कि इस पेड़ का जीवन तो मेरी वजह से है, वे भी धीरे-धीरे छोड़ चले। अब पेड़ फल-फूल-पत्र विहीन खड़ा है। अपनों के द्वारा जबरदस्ती वानप्रस्थ दे दिए जाने से यह पेड़ अंदर ही अंदर मरने लगा।

इस पेड़ को बीज से विशाल वृक्ष में बदलने वाले अब धीरे-धीरे उसकी टहनियों को कतरने लगे। अब वृक्ष खड़ा तो है लेकिन बिल्कुल ठूँठ, उसमें प्राण है या नहीं, कह पाना मुश्किल है। एक दिन ऐसा होता है कि उस पेड़ को अपने ही धराशायी कर देते हैं या वह जीवन भर थपेड़ों की मार सहता हुआ स्वयं ही धराशायी हो जाता है। वैसे वह मर तो कब का चुका था।  

-          शुभ